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कई कोच और फुटबॉल विशेषज्ञ मानते हैं कि भीषण गर्मी में ब्रेक उचित हैं, लेकिन हर मैच में इन्हें अनिवार्य बनाना जरूरी नहीं है।
आलोचकों का कहना है कि इससे खेल की गति और रोमांच प्रभावित होता है।
इसके अलावा प्रसारण कंपनियां इन ब्रेक्स का उपयोग विज्ञापनों के लिए कर रही हैं, जिससे कुछ फैंस को लगता है कि फुटबॉल का नैचुरल फ्लो में रुकावट आ रही है।
कई कोचों का यह भी मानना है कि इन ब्रेक्स के दौरान रणनीति बदलने का मौका मिल जाता है, जिससे मैच का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
खेल विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार गर्म और उमस भरे मौसम में खेलने से खिलाड़ियों को ‘एक्सर्शनल हीट इलनेस’ यानी अत्यधिक शारीरिक गर्मी से जुड़ी बीमारी का खतरा होता है।
इसके लक्षणों में मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक थकान, प्रदर्शन में गिरावट, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना और डिहाइड्रेशन शामिल हैं।
जापान की वासेदा यूनिवर्सिटी की खेल वैज्ञानिक यूरी होसोकावा ने कहा, 'जब शरीर का आंतरिक तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है तो खिलाड़ी भ्रमित हो सकता है, आक्रामक व्यवहार कर सकता है या बेहोश भी हो सकता है।
यह हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।' विशेषज्ञों के अनुसार खेल के दौरान होने वाला हीट स्ट्रोक खिलाड़ियों की मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है।
Source: https://www.amarujala.com/photo-gallery/sports/football/fifa-world-cup-2026-hydration-breaks-player-safety-measure-or-disruption-to-the-game-explainer-2026-06-19