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एलन मस्क की स्पेसएक्स, चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई और क्लॉउड डेवलपर एंथ्रोपिक शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं। इन तीनों कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन करीब चार ट्रिलियन डॉलर आंका जा रहा है और इनके जरिए रिकॉर्ड 200 अरब डॉलर तक जुटाए जाने की उम्मीद है। स्पेसएक्स अकेले अपने आईपीओ में लगभग 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रही है, जो इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक ईश्यू में शामिल हो सकता है।
आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए कोई निजी कंपनी पहली बार आम निवेशकों को अपने शेयर बेचती है। इसके बाद कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो जाती है और उसके शेयर सार्वजनिक रूप से खरीदे-बेचे जा सकते हैं। जब कोई कंपनी निजी होती है, तो उसे अपनी गतिविधियों और जोखिमों के बारे में सीमित जानकारी ही सार्वजनिक करनी पड़ती है। लेकिन सार्वजनिक कंपनी बनने के बाद उसे नियमित वित्तीय रिपोर्ट जारी करनी होती है, महत्वपूर्ण जोखिमों का खुलासा करना पड़ता है और नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना पड़ता है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर एआई कंपनियां सार्वजनिक होती हैं, तो उनकी कार्यप्रणाली पर पहले की तुलना में कहीं अधिक निगरानी संभव होगी।
पिछले कुछ वर्षों में AI कंपनियों की ताकत तेजी से बढ़ी है। उनके पास विशाल डेटा, अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता और अरबों डॉलर का निवेश है। एआई मॉडल अब केवल सवालों के जवाब नहीं दे रहे, बल्कि कोड लिख रहे हैं, शोध कर रहे हैं, चित्र बना रहे हैं और साइबर सुरक्षा जैसे जटिल क्षेत्रों में भी इस्तेमाल हो रहे हैं। इसी वजह से दुनिया भर में चिंता बढ़ी है कि अगर इतनी शक्तिशाली तकनीक कुछ गिनी-चुनी कंपनियों के हाथ में केंद्रित हो जाए तो उसके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिणाम क्या होंगे। पोप से लेकर वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं तक कई लोगों ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। प्रमुख चिंताओं में गलत सूचना, डीपफेक, साइबर हमले, निगरानी, गोपनीयता का उल्लंघन और रोजगार पर असर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) साइबर हमलों को पहले से कहीं अधिक तेज, सस्ता और प्रभावी बना रहा है, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। आईएमएफ के मुताबिक AI की मदद से हैकर्स सॉफ्टवेयर और नेटवर्क की कमजोरियों को बहुत तेजी से खोज और उनका दुरुपयोग कर सकते हैं। बैंकिंग, भुगतान प्रणाली, क्लाउड सेवाओं और अन्य साझा डिजिटल ढांचों पर एक साथ बड़े पैमाने पर हमले हो सकते हैं, जिससे कई वित्तीय संस्थान एक साथ प्रभावित हो सकते हैं। IMF ने कहा है कि साइबर जोखिम अब केवल तकनीकी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संभावित "मैक्रो-फाइनेंशियल शॉक" बन सकता है जो पूरी वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
यहीं सबसे बड़ी बहस शुरू होती है। सैद्धांतिक रूप से शेयर बाजार का उद्देश्य उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर किसी कंपनी का उचित मूल्य तय करना है। अगर एआई कंपनियां अपने जोखिमों को छिपाती हैं, तो निवेशक उन्हें दंडित कर सकते हैं। इसलिए कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार AI सुरक्षा को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकता है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि बाजार हमेशा दीर्घकालिक सामाजिक जोखिमों को सही तरीके से नहीं पहचानता। कई बार निवेशक तात्कालिक मुनाफे पर अधिक ध्यान देते हैं।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/ai-companies-enter-stock-market-will-accountability-increase-and-risks-decrease-2026-06-12