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गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार भारी बिकवाली और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सुबह बाजार ने भारी गिरावट के साथ शुरुआत की थी। हालांकि, दिनभर चले अस्थिर कारोबार और निचले स्तरों से आई रिकवरी के बाद प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ लगभग सपाट स्तर पर बंद होने में सफल रहे।
टॉप गेनर्स: बाजार को संभालने में कुछ चुनिंदा शेयरों ने बड़ी भूमिका निभाई; टाइटन के शेयरों में 4% और इटरनल में 3% की जोरदार तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा, अदानी पोर्ट्स और टेक महिंद्रा के शेयर भी मुनाफे में रहे।
टॉप लूजर्स: दूसरी ओर, ट्रेंट, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयरों में भारी बिकवाली और नुकसान हावी रहा।
सुबह की गिरावट और विदेशी फंड की बिकवाली का असर गुरुवार की सुबह बाजार का परिदृश्य काफी कमजोर था। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 229.69 अंक गिरकर 74,139.32 पर और निफ्टी 66.30 अंक फिसलकर 23,339 पर आ गया था। बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है। एक्सचेंज के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को ही विदेशी निवेशकों ने 5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची थी। इस बिकवाली से पहले, बुधवार को भी सेंसेक्स 303.67 अंक और निफ्टी 77.95 अंक गिरकर बंद हुआ था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस ट्रेंड को समझाते हुए बताया कि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में फिलहाल तेजी का माहौल है। यह स्थिति भारत से और अधिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी का स्पष्ट संकेत देती है। वैश्विक बाजार और पश्चिम एशिया का तनाव भारतीय बाजार पर दबाव के मुख्य कारणों में वैश्विक स्तर पर कमजोर रुझान और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार भी बुधवार को निचले स्तर पर बंद हुए थे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम समझौते के नवीनीकरण से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बनी हुई शत्रुता और ईरानी जवाबी कार्रवाई की रिपोर्टों ने अनिश्चितता को काफी बढ़ा दिया है। इस राजनयिक समाधान की कमी का असर वैश्विक व्यापार प्रवाह और ऊर्जा कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.97 फीसदी गिरकर 96.86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
Source: https://www.amarujala.com/business/bazaar/share-market-closing-sensex-nifty-settle-flat-after-choppy-trade-amid-foreign-fund-outflows-2026-06-04