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तृणमूल के भीतर जारी इस संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल दलबदल विरोधी कानून को लेकर भी उठ रहा है। लोकसभा में किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद अगर अलग गुट बनाते हैं, तभी उन्हें कानूनी राहत मिल सकती है। तृणमूल के 28 सांसदों में से दो-तिहाई संख्या करीब 19 होती है। ऐसे में 20 सांसदों का दावा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
हालांकि जब तक पत्र सार्वजनिक नहीं होता और सांसद खुलकर सामने नहीं आते, तब तक यह साफ नहीं हो पाएगा कि बागी गुट के पास वास्तव में जरूरी संख्या है या नहीं। इसी वजह से फिलहाल यह मामला दावे और सियासी संदेश के बीच फंसा हुआ नजर आ रहा है।
काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनका समूह अब एनडीए के साथ राजनीतिक रूप से आगे बढ़ना चाहता है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बंगाल में भाजपा और तृणमूल के बीच सीधी लड़ाई अब नए मोड़ पर पहुंच सकती है। भाजपा पहले से ही बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है और तृणमूल के भीतर टूट की खबरें उसे राजनीतिक फायदा दे सकती हैं।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/trinamool-rebellion-20-mps-written-letter-lok-sabha-speaker-names-undisclosed-what-mamatas-numerical-strength-2026-06-10