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दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने दावा किया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल कई तरह की अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इनमें परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करना, साइबर ठगी, ड्रग तस्करी, कट्टरपंथी सामग्री का प्रसार, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियां, बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री, कॉपीराइट उल्लंघन और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं।
सरकार ने टेलीग्राम को "नया डार्क वेब" तक करार दिया है। उसका कहना है कि प्लेटफॉर्म की गोपनीयता संबंधी सुविधाएं जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना मुश्किल बना देती हैं।
हलफनामे में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल मालवेयर फैलाने, साइबर हमलों को बढ़ावा देने, चोरी किए गए डेटा को साझा करने, मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क चलाने और बॉट्स व चैनलों के जरिए लोगों की निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच उपलब्ध कराने के लिए भी किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसने शुरुआत में टेलीग्राम पर सीधे प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं किया था। अधिकारियों ने पहले कम हस्तक्षेप वाली रणनीति अपनाई और कंपनी को अपनी व्यवस्था सुधारने का अवसर दिया।
इसी के तहत 3 जून 2026 को टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया गया। इस बैठक में सरकार ने चिंता जताई कि प्लेटफॉर्म परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़े चैनलों की पहचान कर उन्हें सक्रिय रूप से रोकने में सक्षम नहीं है।
सरकार के अनुसार, टेलीग्राम ने स्वीकार किया था कि ऐसे कंटेंट की पहले से पहचान करने की उसकी क्षमता सीमित है। कंपनी ने यह भी कहा था कि रिपोर्ट किए गए चैनलों पर उसके मॉडरेटर कार्रवाई कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा समिति ने टेलीग्राम के अधिकारियों की दलीलें भी सुनी थीं और उनका रिकॉर्ड तैयार किया था।
टेलीग्राम की ओर से तर्क दिया गया कि कानून इस तरह के विभाजन या अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर कार्रवाई की अनुमति नहीं देता। कंपनी का कहना है कि यदि आदेश का मूल आधार ही गलत साबित होता है, तो पूरा आदेश टिक नहीं सकता। अदालत ने टेलीग्राम के इस तर्क को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि मामले के दोनों पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश में कानूनी खामियों का भी आरोप लगाया है। हालांकि, दूसरी ओर समीक्षा समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देशों को बरकरार रखने की सिफारिश की थी।
Source: https://www.amarujala.com/technology/tech-diary/delhi-high-court-seeks-telegram-response-on-paper-leak-monitoring-and-dark-web-allegations-2026-06-18