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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर बिना किसी उचित कारण के पति या पत्नी लंबे समय तक वैवाहिक जिम्मेदारियों से इन्कार करते हैं, जिसमें शारीरिक संबंध भी शामिल है तो इसे क्रूरता माना जाएगा और यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का वैध आधार हो सकता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अपने एक फैसले में कह कि वैवाहिक जीवन केवल कानूनी अधिकारों का संबंध नहीं है बल्कि यह आपसी सम्मान, विश्वास, भावनात्मक सहयोग और जिम्मेदारियों पर आधारित साझेदारी है।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/supreme-court-says-refusal-of-marital-duties-can-amount-to-cruelty-valid-ground-for-divorce-2026-06-04