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कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर नाराजगी जताई। ईडी ने अदालत से सुनवाई टालने की मांग की, जिस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पहले मामले को सूचीबद्ध कराने की जल्दबाजी रहती है और बाद में स्थगन की मांग की जाती है, जबकि न्यायाधीश ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ चैतन्य बघेल को मिली जमानत के खिलाफ ईडी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान ईडी ने अपने पक्ष को रखने के लिए और समय मांगा। इस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पहले कहते हैं सूचीबद्ध कीजिए और फिर सूचीबद्ध हो जाती है तो स्थगन मांग लेते हैं। हम इन मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अदालतों में बार-बार स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसी वर्ष जनवरी में चैतन्य बघेल को जमानत दी थी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि चैतन्य बघेल न तो आबकारी विभाग में किसी आधिकारिक पद पर थे और न ही राज्य की शराब कंपनियों में उनकी कोई वैधानिक भूमिका थी। अदालत ने यह भी कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मुख्य रूप से पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और अन्य आरोपियों से कथित संबंधों पर आधारित हैं। हाईकोर्ट के अनुसार उनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष और स्पष्ट कार्रवाई का आरोप सामने नहीं आया था।

जमानत देते समय हाईकोर्ट ने माना था कि मामले के आरोप गंभीर हैं, लेकिन केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा था कि चैतन्य बघेल की कथित भूमिका अनुमान और परोक्ष निष्कर्षों पर आधारित दिखाई देती है। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले में बड़ी संख्या में आरोपी, गवाह और दस्तावेज शामिल हैं, इसलिए मुकदमे के निकट भविष्य में पूरा होने की संभावना कम है। ऐसे में लगातार जेल में रखना निर्दोष माने जाने के सिद्धांत को कमजोर कर सकता है।

ईडी का दावा है कि चैतन्य बघेल कथित शराब सिंडिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे और करीब 1,000 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई के संचालन से जुड़े थे। जांच एजेंसी के अनुसार 2019 से 2023 के बीच कथित तौर पर शराब बिक्री पर अवैध कमीशन वसूला गया, बिना हिसाब-किताब के शराब उत्पादन हुआ और आबकारी राजस्व में हेरफेर की गई। ईडी का आरोप है कि इससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

कथित शराब घोटाले की जांच ईडी के अलावा छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) भी कर रही है। इस मामले में कई नेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब तक कई आरोप पत्र और अभियोजन शिकायतें दाखिल कर चुकी हैं। यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में गिना जा रहा है।

Source: https://www.amarujala.com/world/cji-expresses-displeasure-with-ed-in-chaitanya-baghel-case-says-we-study-matter-then-you-seek-adjournment-2026-06-17