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केरल बीते कुछ वर्षों में देश का सबसे ज्यादा संक्रामक रोगों से प्रभावित राज्य रहा है, ये कहना गलत नहीं होगा। लेप्टोस्पायरोसिस रोग के मामले हों या फिर ब्रेन-ईटिंग अमीबा संक्रमण का खतरा, हेपेटाइटिस-ए इंफेक्शन हों या निपाह के मामले, ये सभी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार चिंता बढ़ाते रहे हैं। अब केरल में एक नई मुसीबत सिर उठाती दिख रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में शिगेला संक्रमण का खतरा देखा जा रहा है, इससे संक्रमित एक चार वर्षीय बच्चे की मौत भी हो गई है।
केरल में कैसे हैं हालात? एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि राज्य में शिगेला संक्रमण के अब तक 126 मामले सामने आए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और बचाव के उपाय तेज कर दिए हैं।
शिगेला संक्रमण की पुष्टि होने के बाद तीन बच्चों को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से दो बच्चे ठीक होकर घर चले गए, लेकिन थलाकुलथुर की रहने वाली नीला की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल उबला हुआ और ठंडा पानी ही पिएं, साफ-सफाई का ध्यान रखें और दूषित स्रोतों का पानी न पिएं।
स्वास्थ्य अधिकारी वायनाड जैसे दूसरे हिस्सों में भी छात्रों में पेट की बीमारी की जांच कर रहे हैं।
सुल्तान बथेरी इलाके के शिक्षण संस्थानों के 164 छात्रों में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण देखे गए हैं। हालांकि ये शिगेला के कारण हैं या नहीं इसकी पुष्टि होनी बाकी है।
क्यों बार-बार संक्रामक रोगों की चपेट में आ जाता है राज्य? शिगेला के मामलों ने एक बार फिर से कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ये बीमारी क्या है और कैसे ये जानलेवा रूप ले लेती है। सबसे बड़ा सवाल ये रहा है कि केरल में संक्रामक रोगों के मामले इतने क्यों देखे जाते हैं?
कई अध्ययन इस बात को लेकर लोगों को सावधान करते रहे हैं कि भारत में जूनोटिक बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है।
दक्षिण भारत इन रोगों से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि यहां जंगलों और इंसानी बस्तियों का सीधा संपर्क है और मानसून के कारण मच्छर तथा अन्य वाहक तेजी से फैलते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वनों की कटाई और शहरीकरण के चलते इन बीमारियों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जब जंगल काटे जाते हैं, तो जंगली जानवर इंसानों के करीब आ जाते हैं और उनके शरीर में मौजूद वायरस हमारे शरीर तक पहुंच जाते हैं।
अब आइए शिगेला संक्रमण के बारे में जान लेते हैं।
शिगेला संक्रमण और इसका खतरा मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शिगेला एक बेहद संक्रामक बैक्टीरियल बीमारी है। ये आंतों को प्रभावित करती है। समय पर संक्रमण की पहचान न हो पाए तो गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को खतरा ज्यादा होता है।
थोड़ी-सी गंदगी, दूषित पानी या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से भी ये संक्रमण फैल सकता है।
जिन स्थानों पर स्वच्छता की कमी रहती है वहां इसका प्रकोप ज्यादा देखा जाता रहा है।
शिगेला संक्रमण या शिगेलोसिस एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो शिगेला नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। ये बड़ी आंत को प्रभावित करती है जिससे गंभीर दस्त, पेट दर्द तथा बुखार का खतरा रहता है। यह दुनिया में डायरिया से जुड़ी प्रमुख संक्रामक बीमारियों में शामिल है।
कैसे फैलता है ये संक्रमण स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, संक्रमित व्यक्ति के मल में मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्तियों में इसका खतरा हो सकता है। यह दूषित पानी, दूषित भोजन, गंदे हाथों या संक्रमित सतहों के संपर्क भी फैलता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शिगेला के संक्रमण के लिए बहुत कम बैक्टीरिया भी पर्याप्त होते हैं। यही कारण है कि यह बीमारी अत्यधिक संक्रामक मानी जाती है।
संक्रमण के लक्षण में लगातार दस्त की समस्या होती रहती है। कई बार खूनी दस्त भी हो सकते हैं। इसके अलावा तेज बुखार, पेट में मरोड़, उल्टी, मतली, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी भी देखी जाती है।
कैसे करें इस संक्रामक रोग से बचाव? शिगेला से बचाव के लिए स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे प्रमुख है।
साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोना संक्रमण रोकने में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
शौचालय उपयोग करने के बाद और खाना खाने से पहले हाथ धोना जरूरी है।
साफ और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाना चाहिए।
खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचाव करना भी जरूरी माना जाता है।
अधिकांश मामलों में मरीज 5 से 7 दिनों के भीतर ठीक हो जाते हैं, लेकिन शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी रोग को गंभीर बना सकती है। बच्चों को इस खतरे से बचाने के लिए माता-पिता को अलर्ट रहना चाहिए। -------------- नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
Source: https://www.amarujala.com/photo-gallery/lifestyle/fitness/shigella-infection-in-kerala-cause-death-of-4-year-old-child-know-shigella-infection-causes-symptoms-and-risk-2026-06-08