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टेलीविजन की दुनिया बाहर से जितनी रंगीन दिखाई देती है, उसके पर्दे के पीछे उतनी ही जटिल भावनाएं, दबाव और संघर्ष भी छिपे हो सकते हैं। ग्लैमर और पर्दे की चमक आमतौर पर इस स्याह पक्ष को कभी उजागर ही नहीं होने देती, लिहाजा हम कभी सोचते भी नहीं कि इसके कलाकारों को भी कोई समस्याएं हो सकती हैं।

पर्दे पर हंसी, पर दिल में दर्द मनोरोग विशेषज्ञों की मानें तो आत्महत्या का कोई एक कारण नहीं होता। ये कई अलग-अलग स्थितियां जैसे स्ट्रेस-डिप्रेशन, आर्थिक दबाव, करियर की अनिश्चितता, अकेलापन और नशे की समस्या भी हो सकती है। ये भी हो सकता है कि आत्महत्या के कदम के पीछे इनमें से कई कारण एक साथ हों। पर्दे की दुनिया में काम की अस्थिरता, लोकप्रियता बनाए रखने का दबाव, ऑनलाइन ट्रोलिंग के साथ-साथ कलाकार के निजी जीवन की समस्याएं भी ऐसी स्थितियां उत्पन्न कर सकते हैं, जिनमें व्यक्ति 'ब्लैंक' हो जाता है। उसकी सारी उम्मीदें खत्म सी होने लगती हैं और जीवन बोझ बनने लग जाता है। हालिया मामला अभिनेत्री 22 वर्षीय संचिता उगले का है। 14 जून को मुंबई में संचिता ने आत्महत्या कर ली। संचिता के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह डिप्रेशन की शिकार थी और अक्सर परेशान रहा करती थी।

प्रत्युषा बनर्जी (2016), लोकप्रिय धारावाहिक बालिका वधू से चर्चित अभिनेत्री ने मुंबई में आत्महत्या की।

सेजल शर्मा (2020): मुंबई स्थित आवास पर आत्महत्या कर ली।

तुनिषा शर्मा (2022): मुंबई के नयागांव में अपने टीवी शो 'अलीबाब' के सेट पर अपनी वैनिटी वैन में आत्महत्या कर ली थी।

प्रेक्षा मेहता (2022): क्राइम पेट्रोल की अभिनेत्री ने अपने घर पर आत्महत्या कर ली।

वैशाली ठक्कर (2022): ये रिश्ता क्या कहता है कि अभिनेत्री ने इंदौर में आत्महत्या कर ली।

क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ? आत्महत्या के कारणों के बारे में समझने के लिए हमने भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की। डॉ कहते हैं, आत्महत्या शायद ही कभी किसी एक घटना का परिणाम होती है। यह अक्सर जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यक्तिगत कारकों के संयोजन से जुड़ी होती है। कलाकारों के मामलों में रिश्तों में तनाव, करियर का दबाव, आर्थिक अनिश्चितता, लगातार सार्वजनिक मूल्यांकन, सोशल मीडिया पर आलोचना और पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं और किसी भी घटना के पीछे कारणों का अनुमान लगाना गलत हो सकता है। पहले भी कई मामलों में हमने देखा है कि डिप्रेशन, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग और जीवन में बड़े नकारात्मक बदलाव आत्मघाती जोखिम से जुड़े पाए गए हैं। टीवी-ग्लैमर की दुनिया वालों में क्यों इतना खतरा? डॉ सत्यकांत कहते हैं, टीवी की दुनिया बिल्कुल वैसी नहीं होती, जैसी हम पर्दे पर देखते हैं। हम ऐसा समझना भी नहीं चाहिए। कलाकारों की भी हमारी तरह भावनाएं होती हैं, वो भी मानसिक समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। कलाकार शायद ज्यादा होते हैं, क्योंकि वह कई ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं जिन्हें अक्सर हम सच मानने को ही तैयार नहीं होते। सोशल मीडिया का दबाव, दूसरों की तुलना में काम न मिलना, टीवी की दुनिया से जुड़े लोगों में बढ़ते मानसिक तनाव का बड़ा कारण हो सकता है।

फिर सवाल ये है कि शिक्षित-जागरूक होने के बाद भी समय पर डॉक्टर की मदद क्यों नहीं ले पाते? मनोचिकित्सक कहते हैं, इसके दो बड़े कारण हो सकते हैं। 1. कई बार लोगों को समझ ही नहीं आता कि उन्हें जो दिक्कतें हो रही हैं वह मेंटल हेल्थ समस्याओं के कारण हैं। 2. दूसरा कारण- हमारी मनोस्थिति कैसी है, क्या हम तनाव, असफलता, अस्वीकारिता और आर्थिक दबाव को सही तरीके से ले पा रहे हैं? इस तरह के जोखिमों को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि टीवी की दुनिया के लोगों को इस ट्रेनिंग में आना होगा कि असफलता या अस्वीकारिता में खुद को खत्म करने से बेहतर है प्रोफेशनल मदद ली जाए। हमारे पाठ्यक्रम में गणित, विज्ञान जैसी विषयों पर तो जोर दिया जाता है पर स्ट्रेस मैनेजमेंट, भावनात्मक नियंत्रण और विपरीत परिस्थितियों का कैसे हैंडल करना है इसपर कभी ध्यान ही नहीं दिया जाता है। विकसित भारत के युवाओं को हमें सिखाना होगा कि वह असफलताओं को भी स्वीकारना सीखें। जो आपके मन को न हो उसे भी हैंडल करना सीखें। मेंटल फ्लेक्सिबिलिटी आने वाली सदियों का सबसे बड़ा टूल होगा। आत्महत्या की रोकथाम में परिवार, मित्र, सहकर्मी और कार्यस्थल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार, नींद, भूख, बातचीत या सामाजिक गतिविधियों में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो उससे संवेदनशीलता के साथ बात करना उपयोगी हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना और भावनात्मक सहयोग देना महत्वपूर्ण कदम हैं। कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग सेवाएं और तनाव प्रबंधन कार्यक्रम भी लाभदायक हो सकते हैं। -------------- नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

Source: https://www.amarujala.com/lifestyle/fitness/sanchita-ugale-depression-and-death-why-mental-health-issues-suicide-increasing-in-tv-actresses-2026-06-18