खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

केंद्रीय मंत्री ने देश की इस नई ताकत का ब्योरा देते हुए कहा कि भारत अब मैन्युफैक्चरिंग के अगले और बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुका है। हम अब इलेक्ट्रॉनिक्स के बेहद जटिल और बुनियादी कंपोनेंट्स यानी कलपुर्जों का निर्माण खुद अपने देश में बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।

बीते साल के आंकड़े देश की इस तरक्की की गवाही देते हैं। भारत ने पिछले साल चीन को करीब 35,000 करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे निर्यात किए हैं। इतना ही नहीं भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए बेहद जटिल रेलवे प्रोपल्शन यानी इंजन सिस्टम को फ्रांस, जर्मनी, इटली और खुद अमेरिका जैसे विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साल 2014 के उन दिनों को याद करना जरूरी है जब भारत अपनी जरूरतों के लिए विदेशों से स्मार्टफोन आयात करने पर पूरी तरह निर्भर था। लेकिन आज स्थितियां पूरी तरह उलट चुकी हैं। स्मार्टफोन अब भारत के निर्यात सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।

साल 2025 में भारत ने विदेशों में लगभग 30 बिलियन डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन भेजे हैं। साल 2025 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स का क्षेत्र देश के माल निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी कैटेगरी बन गया है। इसमें मोबाइल फोन ने सबसे बड़े एकल निर्यात उत्पाद के रूप में अपनी जगह बनाई है।

पारंपरिक तौर पर भारत के निर्यात बाजार पर हमेशा से डीजल, रत्न-आभूषण, गारमेंट्स और इंजीनियरिंग के कपड़ों का ही दबदबा रहा करता था। लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक्स ने इस पुराने ढर्रे को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। अश्विनी वैष्णव का मानना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि आज पूरी दुनिया ने भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद वैल्यू चेन पार्टनर के रूप में स्वीकार कर लिया है।

वैश्विक बाजार को अब पूरा भरोसा है कि भारत बेहतरीन क्वालिटी के सामान बना सकता है और सुरक्षित तथा बेहद भरोसेमंद उत्पादों को डिजाइन भी कर सकता है। सुरक्षा के नजरिए से भी आज दुनिया भारतीय प्रोडक्ट्स को सबसे अव्वल मानती है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी आईएसएम (ISM) के पहले चरण में सरकार ने करीब 48 नए स्टार्टअप्स को तकनीकी उत्पाद बनाने के काम से सफलतापूर्वक जोड़ा है। अब सरकार इसके अगले चरण यानी आईएसएम 2.0 की तैयारियों में जुट गई है। इस नए चरण में सबसे ज्यादा प्राथमिकता चिप की डिजाइनिंग को दी जाएगी।

इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा फोकस उन बड़ी मशीनों पर होगा जिनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर बनाने में किया जाता है। सरकार की कोशिश है कि दुनिया के बड़े मशीन निर्माताओं को भारत लाया जाए ताकि वे यहीं पर मशीनों को डिजाइन और मैन्युफैक्चर कर सकें।

सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण सिर्फ मशीनों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। चिप बनाने के लिए बेहद जटिल रसायनों और विशेष गैसों की जरूरत होती है। नए चरण में इन रसायनों का स्वदेशी उत्पादन भी भारत में ही शुरू किया जाएगा।

इसके साथ ही देश में कई नए चिप विनिर्माण प्लांट यानी फैब्स और चिप पैकेजिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा पहले चरण में देश के भीतर हुनरमंद युवाओं को तैयार करने का जो सिलसिला शुरू हुआ था उसे अब और भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के भीतर प्रतिभाओं को निखारने के लिए किए गए काम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। भारत के तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों के पास अब दुनिया के सबसे आधुनिक उपकरण और सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स मौजूद हैं। देश के युवा छात्र खुद जिस चिप को डिजाइन करते हैं उसका निर्माण मोहाली की एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला में किया जाता है।

छात्र अपनी बनाई हुई डिजाइन को एक असली फिजिकल चिप के रूप में अपनी आंखों के सामने देख सकते हैं। इस तरह की अनूठी और आधुनिक क्षमता दुनिया के मुट्ठी भर कॉलेजों के पास ही मौजूद है जो अब भारतीय छात्रों को मिल रही है।

Source: https://www.amarujala.com/technology/tech-diary/india-emerges-global-tech-partner-exporting-electronics-to-us-and-china-ashwini-vaishnaw-2026-06-10