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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच में जुटी एसआईटी अब वर्ष 2021 से लेकर वर्तमान तक के पूरे रिकॉर्ड को खंगाल रही है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने मंदिर परिसर और उससे जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं में कार्यरत रहे लोगों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इसके तहत ट्रस्ट से उन कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों की सूची भी मांगी गई है, जो पिछले वर्षों में विभिन्न व्यवस्थाओं में लगाए गए थे।

महंत धर्मदास ने कहा कि ट्रस्ट का अर्थ ही विश्वास होता है, लेकिन जब विश्वास समाप्त होने लगे तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। अयोध्या के संतों और स्थानीय लोगों की उपेक्षा हुई है।

वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने मामले को सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताते हुए राजनीतिक आरोप लगाए।

विशेष सुविधाओं के नाम पर वसूली के आरोप भी रहे चर्चा में राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर पूर्व में भी कुछ शिकायतें सामने आती रही हैं। समय-समय पर वीआईपी पास, विशेष दर्शन अथवा प्राथमिकता सुविधा दिलाने के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप चर्चा में रहे हैं।

हालांकि इन मामलों में आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग समय पर स्पष्टीकरण भी दिए गए, लेकिन मौजूदा जांच के दौरान पुराने विवाद और शिकायतें भी फिर से चर्चा में आ गई हैं।

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी उन सभी पहलुओं को जोड़कर देख रही है जिनसे व्यवस्थागत कमजोरियों का संकेत मिलता हो।

Source: https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/ayodhya/theft-of-donations-at-ram-mandir-sit-scrutinizing-records-from-2021-to-date-2026-06-17