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राम मंदिर में दान की राशि चोरी होने के मामले में सवाल ही सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ट्रस्ट ने अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। वहीं दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों को यह किसने अधिकार दिया कि पिछले करीब दो सप्ताह से संदिग्धों को बैठाकर उनसे पूछताछ कर रहे हैं। यहां तक कि उनको लेकर घरों से रकम भी बरामद की गई थी। वहीं एसआईटी की जांच से पहले कहीं ऐसा तो नहीं कि सबूत मिटाए गए हों। ऐसी आशंका भी बढ़ गई है।
जब यह साबित हो गया है कि चोरी हुई है, संदिग्धों ने रकम भी बरामद कराई है, तो ट्रस्ट की तरफ से केस क्यों नहीं दर्ज कराया जा रहा है। एसआईटी का गठन भी चार-पांच दिन बाद हुआ था। ऐसे में कहीं ऐसा तो नहीं कि बड़े जिम्मेदार सबूत मिटाने में जुटे रहे, इसलिए तत्काल केस दर्ज नहीं कराया गया। हालांकि सूत्रों का दावा है कि एसआईटी की जांच में कई अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनकी मदद से जांच आगे बढ़ रही है। कई बड़े लोग भी जांच की जद में आ सकते हैं।
मामले में तीन शिकायतें हो चुकी हैं। तहरीर भी थाने में दी जा चुकी हैं। तहरीर देने वाले सभी बाहरी हैं। मतलब न तो उनका ट्रस्ट से कोई संबंध है और न ही वे मंदिर प्रबंधन आदि से जुड़े हैं। इसलिए शायद उनकी तहरीर पर केस दर्ज नहीं किया जा रहा है। वहीं ऊपर से दबाव होने की भी बात सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर अब एफआईआर दर्ज होगी तो वह एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद कराई जाएगी, जो एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर होगी।
चंपत राय के ड्राइवर व सबसे अधिक सवालों के घेरे में रहने वाले टिन्नू यादव से एसआईटी ने बृहस्पतिवार को दोबारा पूछताछ की। खासकर दान की राशि की प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका रहती थी? गिनती करने वाले लोगों में उसके खास कर्मचारी कौन लोग थे? उसकी मौजूदगी वहां क्यों रहती थी? क्योंकि वह ट्रस्ट का पदाधिकारी भी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक वह गोलमाल जवाब देता रहा। वहीं उसने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम बताया है, इसलिए एसआईटी इन दोनों पर शिकंजा कस सकती है। खासकर अनिल मिश्रा पर। वह शुरू से मामले इधर उधर बचते रहे हैं।
चौथे दिन एसआईटी ने ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के अलावा कर्मचारियों व संदिग्ध लोगों समेत करीब 18 लोगों से पूछताछ की है। इसमें टिन्नू का भतीजा मनीष यादव और गोपाल राव का भतीजा सोमेश भी शामिल रहा। ये दोनों कोई पदाधिकारी नहीं हैं लेकिन इन सभी मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था। ..आखिर कहां गया मेरा हार कनार्टक निवासी एक श्रद्धालु ने सोशल मीडिया पर बयान दिया है। जिसमें बताया कि उसने मंदिर में कीमती हार दान किया था लेकिन उसकी रसीद आज तक नहीं मिली। पता ही नहीं चला कि हार का क्या किया गया। इसी तरह के कई और मामले सामने आए हैं। जिसमें चढ़ावे के जेवरात इधर से उधर करने की बात सामने आई है। एसआईटी इन सभी पहलुओं को गंभीरता से छानबीन रही है।
Source: https://www.amarujala.com/lucknow/ram-temple-donation-theft-no-fir-has-been-filed-yet-is-evidence-being-destroyed-2026-06-19