अरुणाचल प्रदेश सरकार ने घुसपैठ रोकने, इनर लाइन परमिट व्यवस्था मजबूत करने, एपीएसटी प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन और स्थानीय जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा के लिए चार उच्चस्तरीय समितियां गठित की हैं। सभी समितियां छह महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी।
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अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि राज्य सरकार ने घुसपैठ रोकने, इनर लाइन परमिट (आईएलपी) व्यवस्था को मजबूत करने, अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन और स्थानीय जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा के लिए चार उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 27 और 29 मई को उनकी अध्यक्षता में हुई बैठकों में पारित प्रस्तावों के आधार पर ये समितियां बनाई गई हैं। इन बैठकों में आदिवासी अधिकारों, अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति (एपीएसटी), आईएलपी व्यवस्था और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
इन समितियों में विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
घुसपैठ और अवैध प्रवास से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्री वांगकी लोवांग की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। यह समिति राज्य में घुसपैठ और अवैध प्रवास की स्थिति का अध्ययन करेगी। साथ ही सीमा सुरक्षा, बायोमेट्रिक और डिजिटल सत्यापन प्रणाली को मजबूत करने के उपाय सुझाएगी। समिति फर्जी पहचान पत्रों और अवैध बस्तियों के नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए भी सुझाव देगी। इसे अपनी पहली बैठक के छह महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
आईएलपी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए कृषि एवं बागवानी मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू की अध्यक्षता में दूसरी समिति गठित की गई है। यह समिति आईएलपी जारी करने, निगरानी और सत्यापन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। साथ ही वर्ष 2026 के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर सुधार संबंधी सुझाव देगी। समिति तकनीक आधारित आईएलपी प्रणाली विकसित करने और पर्यटकों, आगंतुकों तथा श्रमिकों के लिए उपयुक्त श्रेणियां तय करने के सुझाव भी देगी। तीसरी समिति के अध्यक्ष शिक्षा मंत्री पसांग दोर्जी सोना
एपीएसटी प्रमाणपत्रों के पुनः सत्यापन के लिए शिक्षा मंत्री पसांग दोर्जी सोना की अध्यक्षता में तीसरी समिति बनाई गई है। यह समिति प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। साथ ही मजबूत सत्यापन प्रणाली, डिजिटल और बायोमेट्रिक जांच तथा सुरक्षा उपायों की सिफारिश करेगी। समिति फर्जी या अवैध तरीके से प्राप्त एपीएसटी प्रमाणपत्रों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के सुझाव भी देगी। चौथी समिति के अध्यक्ष कानून मंत्री केंटो जिनी
चौथी समिति कानून मंत्री केंटो जिनी की अध्यक्षता में गठित की गई है। यह समिति गैर-एपीएसटी वंशावली दावों और स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच करेगी। समिति जनजातीय अधिकारों के संरक्षण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन करेगी। साथ ही उन कमियों की पहचान करेगी, जिनका दुरुपयोग कर जनजातीय अधिकार हासिल किए जाते हैं। यह समिति जनजातीय पहचान, उत्तराधिकार, भूमि संरक्षण और आरक्षण लाभों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक उपाय सुझाएगी।
सरकार ने सभी चार समितियों को विभागों और जिला प्रशासन से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया है। सभी समितियों को अपनी पहली बैठक के छह महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/pema-khandu-four-high-level-committees-constituted-in-arunachal-will-examine-infiltration-and-tribal-security-2026-06-05