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विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिना अनुमति किसी की तस्वीरों का इस्तेमाल हो सकता है। खासकर कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए यह बड़ा जोखिम है, क्योंकि उनकी पहचान और चेहरा उनके काम का अहम हिस्सा है।
ऐसे में फर्जी तस्वीरें, नकली प्रमोशन, पहचान की चोरी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। उनका यह भी मानना है कि एआई से बनने वाले डीपफेक बढ़ने पर असली और नकली तस्वीरों में फर्क करना मुश्किल हो जाएगा।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/meta-muse-image-ai-image-generator-india-it-ministry-review-instagram-deepfake-digital-safety-2026-07-10