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बैंक खाते में बड़ी नकद रकम जमा होते ही आयकर विभाग की नजर उस पर पड़ सकती है। खासकर नोटबंदी के बाद से नकद जमा, कैश बिक्री और कारोबार की नकदी को लेकर जांच का दायरा बढ़ा है। आयकर अपीलीय अधिकरण यानी आईटीएटी के हालिया फैसलों ने एक बात साफ कर दी है...सिर्फ बैंक में कैश जमा होना अपराध नहीं है। सवाल यह है कि उस कैश का स्रोत क्या है और क्या करदाता उसे साबित कर सकता है।
दोनों फैसलों का सार है कि आयकर विभाग सिर्फ रकम नहीं, बल्कि उसकी कहानी देखता है। बैंक में जमा नकद आपकी आय, कारोबार, पुराने रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर और कैश बुक से मेल खाती है, तो उसे समझाया जा सकता है।
अगर रिटर्न में कम आय दिखाई गई हो, कारोबार का रिकॉर्ड कमजोर हो और अचानक खाते में लाखों या करोड़ों रुपये नकद जमा हो जाएं, तो नोटिस आने और टैक्स मांग बनने की आशंका बढ़ जाती है।
अगर नकद जमा अघोषित आय मानी गई, तो आयकर कानून की धारा 69ए और 115बीबीई के तहत टैक्स बहुत भारी पड़ सकता है।
ये दस्तावेज जरूरी नकद बिक्री या कारोबार से आई रकम साबित करने के लिए करदाता के पास खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न, आयकर रिटर्न, पुराने वर्षों का टर्नओवर और ग्राहक सप्लायर रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर कारोबारी कहता है कि नकद जमा बिक्री से आया है, तो उसे दिखाना होगा कि उसके पास इतना स्टॉक था, बिक्री वास्तव में हुई थी और रकम बहीखातों में सही तरीके से दर्ज थी।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/cash-deposit-in-bank-when-can-income-tax-notice-arrive-and-when-are-you-safe-2026-06-09