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क्या आपकी आमदनी और खर्चों का गणित बिगड़ने वाला है? भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं। भारत का वह 'गोल्डीलॉक्स' दौर, जहां विकास दर तेज थी और महंगाई पूरी तरह से काबू में थी, अब धीरे-धीरे खत्म होता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, मौसम के बदलते मिजाज और महंगे कच्चे तेल ने आरबीआई को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। आइए इस एक्सप्लेनर में आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि आरबीआई के इस नए आर्थिक आउटलुक का आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या सीधा असर पड़ने वाला है।
जवाब: अर्थशास्त्र की भाषा में 'गोल्डीलॉक्स' का मतलब उस आदर्श स्थिति से होता है जब देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत होती है और महंगाई दर पूरी तरह से नियंत्रण में रहती है, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी रहती है। पिछले एक साल से भारत इसी शानदार दौर से गुजर रहा था। लेकिन अब आरबीआई के जून के नीतिगत रिव्यू के अनुसार स्थिति बदल रही है। केंद्रीय बैंक ने अपने अनुमानों में बड़ा बदलाव करते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, इसी अवधि के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है।
जवाब: इस आर्थिक दबाव का मुख्य कारण देश की सीमा के बाहर की स्थितियां हैं। आरबीआई के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहा संघर्ष है, जिसके कारण वैश्विक व्यापार मार्ग और आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हुई हैं। अप्रैल और मई के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें औसतन लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर रहीं, जिसने उत्पादन की लागत बढ़ा दी है। अल नीनो की स्थिति और कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून की आशंका कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ रहा है।
जवाब: जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और कमोडिटी महंगी होती हैं, तो इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई और गाड़ी के ईंधन पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल की मार: मई से अब तक खुदरा ईंधन की कीमतों में इजाफा हो चुका है; पेट्रोल 7.4 प्रतिशत और डीजल 8.4 प्रतिशत महंगा हो गया है। एमपीसी का मानना है कि केवल इसी वृद्धि से मुख्य महंगाई दर में करीब 36 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है।
दैनिक चीजें होंगी महंगी: इसके अलावा, कमर्शियल एलपीजी, रबर, प्लास्टिक, रसायन और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।
क्रय शक्ति घटेगी: आरबीआई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बढ़ती महंगाई परिवारों की क्रय शक्ति को कम कर सकती है, जिससे अंततः आम आदमी की खपत और खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी।
जवाब: हां, इतनी चुनौतियों के बावजूद आरबीआई का संदेश निराशाजनक नहीं है। भारत के घरेलू बुनियादी ढांचे अभी भी इतने मजबूत हैं कि वे बाहरी झटकों को आसानी से सह सकते हैं।
मजबूत घरेलू मांग: आम आदमी की ओर से निजी खपत अब भी लचीली बनी हुई है और विवेकाधीन खर्च अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है।
विदेशी मुद्रा का भंडार: 29 मई 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.3 अरब डॉलर के भारी-भरकम स्तर पर था, जो देश के 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
उधारी और निवेश: बैंकों की उधारी 15.4 प्रतिशत की शानदार दर से बढ़ रही है और पूंजीगत व्यय भी मजबूत बना हुआ है।
कोर महंगाई स्थिर: कोर महंगाई दर 3.7 प्रतिशत पर स्थिर है, जिसका अर्थ है कि महंगाई की मुख्य वजह केवल बाहरी सप्लाई की रुकावटें हैं, भारत के अंदर मांग का कोई दबाव नहीं है।
भले ही 'गोल्डीलॉक्स' का सुनहरा दौर ढल रहा है और महंगाई का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत बैंक बैलेंस शीट, रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार और ठोस घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था इस कठिन वैश्विक माहौल का डटकर सामना करने के लिए तैयार है। हालांकि, इस अस्थिरता के बीच आम आदमी को अपने खर्च और घरेलू बजट को लेकर निकट भविष्य में अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/rbi-mpc-explainer-why-did-rbi-cut-gdp-growth-to-6-6-and-how-will-rising-inflation-impact-your-pocket-2026-06-05