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11 जून 2026 को एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इतिहास का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) पेश किया। कंपनी ने शेयर बाजार में कदम रखते ही 75 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम जुटाई है। लेकिन, इस चमकदार आंकड़े के पीछे एक कड़वा सच छिपा है। नए शोध बताते हैं कि यह आईपीओ आम निवेशकों के लिए वैसा शानदार रिटर्न लेकर नहीं आएगा, जिसकी उम्मीद पहले के आईपीओ से पहले थी।

रॉकेट और सैटेलाइट बनाने वाली कंपनी स्पेसएक्स ने 55.56 करोड़ (555.6 मिलियन) शेयर बेचकर अपने आईपीओ से 75 अरब डॉलर जुटाए हैं। इस भारी-भरकम निवेश के बाद कंपनी का कुल मूल्यांकन 1.77 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। यह शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है।

एक शोध के अनुसार, जिन आम निवेशकों ने इस आईपीओ में शेयर खरीदे हैं, उनके लिए पुराने जमाने के आईपीओ जैसी जबरदस्त वृद्धि देखने की संभावना काफी कम है। आजकल कंपनियों की असली और तेज ग्रोथ उनके पब्लिक होने से पहले ही बंद दरवाजों के पीछे हो चुकी होती है।

दशकों पहले, जब कोई कंपनी आईपीओ लाती थी, तो वह शुरुआती दौर में होती थी। तब आम निवेशक पैसे लगाकर कंपनी के भविष्य के विस्तार और मुनाफे में हिस्सेदार बनते थे। ऐतिहासिक रूप से, अमेजन और एपल जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने जीवनचक्र की शुरुआत में ही आईपीओ पेश किया था और उनकी असल ग्रोथ बाजार में लिस्ट होने के बाद हुई। आज के समय में, कंपनियां अपनी ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने के बाद बहुत देर से शेयर बाजार में आती हैं।

आज कंपनियों के पास वेंचर कैपिटल (वीसी) और प्राइवेट इक्विटी (पीई) फर्मों के जरिए निजी तौर पर अरबों डॉलर जुटाने की सुविधा है। इस वजह से उन्हें शुरुआती दौर में पब्लिक मार्केट (शेयर बाजार) से पैसे की जरूरत नहीं पड़ती। एक रिसर्च के मुताबिक, 2000 के दशक की शुरुआत में आईपीओ लाने वाली कंपनी की औसत उम्र 4 साल होती थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 10 साल हो गई है।

चूंकि कंपनियां लंबी अवधि तक प्राइवेट रहती हैं, इसलिए कॉर्पोरेट वैल्यू (मूल्यांकन) में होने वाली तेज और बड़ी बढ़ोतरी उनके प्राइवेट रहते ही हो जाती है। जब तक कंपनी आम जनता के लिए शेयर जारी करती है, तब तक आम निवेशकों के लिए वह 'गोल्डन चांस' निकल चुका होता है।

आजकल आईपीओ का मुख्य उद्देश्य कंपनी की ग्रोथ के लिए पैसा जुटाना नहीं, बल्कि कंपनी के संस्थापकों, अधिकारियों और शुरुआती निवेशकों (इनसाइडर्स) को अपनी हिस्सेदारी बेचकर 'कैश आउट' (मुनाफा वसूली) करने का मौका देना है। शुरुआती निवेशक अपने निवेश को नकदी में बदलना चाहते हैं, जिसे वित्तीय भाषा में 'लिक्विडिटी इवेंट' कहा जाता है।

'चीप स्टॉक' उन स्टॉक ऑप्शंस को कहते हैं जो आईपीओ आने से ठीक पहले कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को दिए जाते हैं। इन ऑप्शंस की कीमत भविष्य में आने वाले आईपीओ के शेयर प्राइस से बहुत कम होती है। 2007 से 2022 के बीच हुए करीब 1,000 आईपीओ के अध्ययन में पाया गया कि औसतन आईपीओ की कीमत, इन अधिकारियों को दिए गए ऑप्शंस की कीमत से 5.7 गुना ज्यादा थी।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए, किसी सीईओ को 2 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर 10,000 शेयर खरीदने का विकल्प (Option) मिला है। कुछ समय बाद कंपनी का आईपीओ 20 डॉलर प्रति शेयर पर आता है। ऐसे में सीईओ तुरंत 2 डॉलर में शेयर खरीदकर उसे बाजार में 20 डॉलर में बेच सकता है और एक झटके में 1,80,000 डॉलर का शुद्ध मुनाफा कमा सकता है।

हां, जिन कंपनियों में वेंचर कैपिटल और प्राइवेट निवेशकों का पैसा लगा होता है, वहां ऑप्शन प्राइस और आईपीओ प्राइस के बीच बहुत बड़ा अंतर देखा जाता है। इसका मकसद कंपनी के अधिकारियों को आईपीओ की प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रेरित करना होता है, ताकि शुरुआती निवेशक अपना पैसा निकाल सकें।

रिसर्च दिखाती है कि जो कंपनियां 'चीप स्टॉक' ज्यादा बांटती हैं, वे शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) पर कम पैसा खर्च करती हैं। अधिकारियों को पहले ही भारी मुनाफा हो चुका होता है, इसलिए वे जोखिम लेने से बचते हैं।

बिल्कुल। जब कंपनी के अधिकारी अपना मुनाफा सुरक्षित कर लेते हैं, तो वे आक्रामक विस्तार के बजाय स्थिर ग्रोथ को चुनते हैं। चूंकि जोखिम और मुनाफे का सीधा संबंध है, कम जोखिम लेने से कंपनी की ग्रोथ धीमी हो जाती है। इसका सीधा असर भविष्य के आम शेयरधारकों पर पड़ता है, जिन्हें लंबी अवधि में कम स्टॉक रिटर्न मिलता है।

इस साल सिर्फ स्पेसएक्स ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां जैसे ओपनएआई और एंथ्रोपिक भी आने वाले महीनों में अपने विशाल आईपीओ लाने वाली हैं। स्पेसएक्स का ऐतिहासिक आईपीओ वॉल स्ट्रीट के बैंकों और एलन मस्क जैसे शुरुआती इनसाइडर्स के लिए एक बंपर पे-डे साबित हो रहा है। लेकिन आम निवेशकों को यह समझना होगा कि आज के दौर का आईपीओ कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का साधन कम, और इनसाइडर्स के लिए मुनाफे के साथ एग्जिट करने का रास्ता ज्यादा बन गया है। इसलिए लंबी अवधि के निवेश से पहले कंपनियों के जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य की रणनीति को समझना बेहद जरूरी है।

Source: https://www.amarujala.com/business/bazaar/spacex-s-75-billion-historic-ipo-why-insiders-win-big-while-retail-investors-may-lose-out-2026-06-12