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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में पिछले कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग महंगाई, बिजली संकट और बेरोजगारी से परेशान हैं।
पीओजेके के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर जैसे इलाकों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगे हैं।
वहां आटे, बिजली और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आम लोग कह रहे हैं कि जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शन रोकने के लिए पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां सख्त कार्रवाई कर रही हैं। कई जगह गोलीबारी, आंसू गैस और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं।
इंटरनेट सेवाएं कई बार बंद की गईं ताकि विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जा सकें। इससे लोगों में और नाराजगी बढ़ी है।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेएएसी नाम का संगठन लगातार आंदोलन चला रहा है। यह संगठन बिजली बिल कम करने, सस्ता आटा देने और राजनीतिक अधिकार बढ़ाने की मांग कर रहा है।
पीओजेके के लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान वहां के संसाधनों का इस्तेमाल करता है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका फायदा नहीं मिलता।
गिलगित-बाल्टिस्तान में भी हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। वहां भी लोग राजनीतिक अधिकार और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पीओजेके में लगातार बढ़ता असंतोष पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वहां जनता अब खुलकर प्रशासन और नीतियों पर सवाल उठाने लगी है।
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, सुरंग और रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। जोजिला सुरंग, चिनाब रेल पुल और जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक जैसी परियोजनाएं विकास की नई तस्वीर पेश कर रही हैं।
कश्मीर घाटी में पर्यटन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे होटल, टैक्सी, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारियों की आमदनी बढ़ी है।
वंदे भारत ट्रेन और नई हाईवे परियोजनाओं ने जम्मू-कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से और मजबूत तरीके से जोड़ना शुरू कर दिया है। इससे यात्रा आसान और तेज हुई है।
केंद्र सरकार ने निवेश बढ़ाने के लिए कई नई नीतियां लागू की हैं। उद्योग, होटल, आईटी और कृषि क्षेत्र में बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं।
जम्मू-कश्मीर में स्टार्टअप संस्कृति भी तेजी से बढ़ रही है। युवा अब नौकरी खोजने के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं।
बिजली, डिजिटल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से दूरदराज के इलाकों तक भी विकास पहुंच रहा है। गांवों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी मजबूत हुई है।
शिक्षा क्षेत्र में नए कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और स्किल सेंटर खोले गए हैं। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलने लगे हैं।
सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद पत्थरबाजी और लंबे बंद जैसे हालात काफी कम हुए हैं। इससे आम लोगों का जीवन और व्यापार सामान्य हुआ है।
सेना और प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में सड़क और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। इससे रणनीतिक रूप से भी जम्मू-कश्मीर की स्थिति मजबूत हुई है।
पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और उद्योग आधारित रोजगार
सीमित सरकारी अवसर और छोटे स्थानीय कारोबार पर निर्भरता
रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे हजारों नौकरियां बढ़ीं
राजनीतिक तनाव और विरोध प्रदर्शनों से पर्यटन प्रभावित
जोजिला सुरंग, चिनाब ब्रिज, रेल और हाईवे परियोजनाओं से रोजगार
बड़े स्तर की विकास परियोजनाओं की कमी
स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप नीति और स्वरोजगार योजनाएं
युवाओं में बेरोजगारी और अवसरों की कमी की शिकायत
नए मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और स्किल सेंटर
सीमित तकनीकी और रोजगार आधारित संस्थान
इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का विस्तार, ई-कॉमर्स को बढ़ावा
होटल, टैक्सी, हस्तशिल्प और कृषि कारोबार को फायदा
महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से कारोबार प्रभावित
रोजगार, सस्ती बिजली और आर्थिक अधिकार
विरोध प्रदर्शन, महंगाई और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
Source: https://www.amarujala.com/india-news/pojk-unrest-gilgit-baltistan-protests-difference-india-jammu-kashmir-projects-zojila-tunnel-breakthrough-2026-06-10