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अगर चुनाव के दिन जीतने वाला उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए योग्य नहीं था या किसी वजह से अयोग्य था। इसके अलावा विजयी उम्मीदवार उसके चुनाव एजेंट या उनकी सहमति से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा चुनाव जीतने के लिए भ्रष्ट आचरण का इस्तेमाल किया गया हो।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत रिश्वत देना, अनुचित प्रभाव डालना, डराना-धमकाना, बल प्रयोग करना, और धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगना भ्रष्ट आचरण माना जाता है।

इसके अलावा राष्ट्रीय प्रतीकों (जैसे राष्ट्रीय ध्वज) का इस्तेमाल करना, उम्मीदवार के चरित्र या उम्मीदवारी के बारे में झूठे बयान प्रकाशित करना, बूथ कैप्चरिंग करना, चुनाव खर्च का झूठा विवरण देना और चुनाव में फायदे के लिए सरकारी कर्मचारियों (जैसे पुलिस, सशस्त्र बल, मजिस्ट्रेट आदि) की मदद लेना भी इसी वर्ग में आता है।

अगर चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी उम्मीदवार के नामांकन पत्र को अनुचित या गलत तरीके से स्वीकार या अस्वीकार कर दिया गया हो। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गलत तरीके से नामांकन का खारिज होना एक ऐसा आधार है जिस पर चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

अगर चुनाव में किसी वोट को गलत तरीके से स्वीकार किया गया हो, अस्वीकार किया गया हो, रद्द किया गया हो, या किसी अवैध वोट को गिन लिया गया हो। हालांकि, ऐसा आरोप लगाते समय अदालत में यह स्पष्ट रूप से साबित करना होता है कि इन विसंगतियों (जैसे ईवीएम या वीवीपैट में गड़बड़ी) के कारण चुनाव नतीजे प्रभावित हुए हैं।

अगर चुनाव संपन्न कराने में भारतीय संविधान, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए), या इसके तहत बनाए गए किन्हीं नियमों या आदेशों का पालन नहीं किया गया हो।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/meenakshi-natarajan-rajya-sabha-nomination-cancelled-congress-supreme-court-election-petition-high-court-2026-06-12