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1. नियुक्तियों में खेल और 'टिन्नू' का नेटवर्क
टीम ने मंदिर परिसर स्थित ट्रस्ट के कार्यालय पहुंचकर दान राशि से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड, दस्तावेज और वित्तीय अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए हैं।
एसआईटी ने घटना से जुड़े अहम सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में लिया है।
टीम ने इस बात की भी बारीकी से जांच की है कि दानपात्र कहां रखे जाते हैं, गिनती से पहले उन्हें किस कमरे में ले जाया जाता है और वहां निगरानी की क्या व्यवस्था है।
एसआईटी ने पकड़े गए संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तलब किया है।
बैंक कर्मियों से विशेष रूप से यह पूछा जा रहा है कि गिनती करने वाले कर्मचारियों की भर्ती किस तरह और किसकी सिफारिश पर की गई थी।
यह जांच केवल वित्तीय हेरफेर तक सीमित नहीं है। एसआईटी यह भी गहराई से खंगाल रही है कि क्या इस गबन के पीछे किसी बड़े पदाधिकारी, ट्रस्टी या शक्तिशाली व्यक्ति का संरक्षण, मिलीभगत या लापरवाही थी।
बताया गया है कि किसी ट्रस्टी की संलिप्तता या गंभीर प्रशासनिक चूक पाई जाती है, तो उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक, इस जांच के दो मुख्य पहलू हैं- पहला इस आपराधिक कृत्य की तह तक जाना और दूसरा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तंत्र स्थापित करना।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/ayodha-ram-mandir-donation-scam-row-claimed-to-be-multi-crore-know-sit-probe-ram-mandir-trust-accussed-explain-2026-06-17