खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

उत्तर कोरिया लंबे समय से चीन का करीबी सहयोगी रहा है। चीन उसकी सबसे बड़ी आर्थिक मदद करता है। खाने-पीने का सामान, ईंधन और व्यापार का बड़ा हिस्सा चीन से ही आता है। माना जाता है कि चीन नहीं चाहता कि उत्तर कोरिया पूरी तरह रूस के प्रभाव में चला जाए। इसलिए जिनपिंग का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा।

शी जिनपिंग ने उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार में लिखे लेख में कहा कि दोनों देशों को रणनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में दबाव की राजनीति और ताकत के इस्तेमाल का विरोध जरूरी है। चीन और उत्तर कोरिया को मिलकर बहुध्रुवीय दुनिया बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। इसे अमेरिका के खिलाफ साझा संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका पर दबाव बनाने का हथियार... उत्तर कोरिया, अमेरिका का बड़ा विरोधी है। जब किम जोंग उन मिसाइल परीक्षण करते हैं या परमाणु ताकत दिखाते हैं, तो अमेरिका का ध्यान एशिया में बंट जाता है। इससे चीन को ताइवान, दक्षिण चीन सागर और व्यापार जैसे मुद्दों पर रणनीतिक फायदा मिलता है।

चीन के लिए बफर स्टेट... उत्तर कोरिया, चीन और अमेरिका समर्थित दक्षिण कोरिया के बीच एक दीवार की तरह काम करता है। अगर उत्तर कोरिया कमजोर पड़ जाए या खत्म हो जाए, तो अमेरिकी सेना सीधे चीन की सीमा तक पहुंच सकती है। इसलिए चीन चाहता है कि उत्तर कोरिया मजबूत बना रहे।

एशिया में अमेरिका की ताकत को चुनौती... उत्तर कोरिया की परमाणु ताकत अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए खतरा बनती है। इससे चीन को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में फायदा मिलता है। चीन चाहता है कि अमेरिका एशिया में पूरी तरह हावी न हो पाए।

रूस-चीन-उत्तर कोरिया धुरी मजबूत होती है... यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया करीब आए हैं। चीन भी इस गठजोड़ का हिस्सा बनकर पश्चिमी देशों के खिलाफ मजबूत मोर्चा तैयार कर सकता है। इससे अमेरिका पर सामूहिक दबाव बढ़ता है।

चीन को कूटनीतिक ताकत मिलती है... जब भी उत्तर कोरिया संकट पैदा करता है, दुनिया चीन की तरफ देखती है क्योंकि चीन ही ऐसा देश है जो किम जोंग उन पर कुछ असर रखता है। इससे चीन खुद को समस्या सुलझाने वाली शक्ति के रूप में पेश करता है।

उत्तर कोरियी का मजबूरी... उत्तर कोरिया काफी हद तक चीन पर निर्भर है। व्यापार, खाद्यान्न, ईंधन और जरूरी सामान चीन से जाता है। इससे चीन को आर्थिक पकड़ और राजनीतिक प्रभाव दोनों मिलते हैं।

जापान और दक्षिण कोरिया पर मनोवैज्ञानिक दबाव... उत्तर कोरिया की मिसाइलें जापान और दक्षिण कोरिया को लगातार डर में रखती हैं। इससे ये देश रक्षा खर्च बढ़ाते हैं और क्षेत्र में तनाव बना रहता है। चीन इस तनाव का इस्तेमाल अपनी रणनीतिक चालों में करता है।

परमाणु मुद्दे पर अमेरिका से सौदेबाजी... चीन कई बार उत्तर कोरिया के मुद्दे का इस्तेमाल अमेरिका से बातचीत में करता है। यानी अगर अमेरिका चीन पर दबाव डाले, तो चीन उत्तर कोरिया कार्ड खेल सकता है।

अमेरिका की सुरक्षा को सीधा खतरा... पहले उत्तर कोरिया की मिसाइलें सिर्फ दक्षिण कोरिया और जापान तक पहुंचती थीं। लेकिन अब उसके पास ऐसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो अमेरिका तक मार कर सकती हैं। इससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा बढ़ गया है।

एशिया में अमेरिका की पकड़ कमजोर पड़ती है... अमेरिका एशिया में खुद को सबसे बड़ी ताकत मानता है। लेकिन उत्तर कोरिया की परमाणु ताकत अमेरिका की सैन्य ताकत को चुनौती देती है। इससे अमेरिका के सहयोगी देशों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

दक्षिण कोरिया और जापान में डर का माहौल... उत्तर कोरिया की मिसाइलें जापान और दक्षिण कोरिया के ऊपर से गुजर चुकी हैं। इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ता है कि वह अपने सहयोगियों की रक्षा करे। अगर अमेरिका ऐसा नहीं कर पाया, तो उसकी वैश्विक छवि कमजोर पड़ सकती है।

परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ता है... उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कई बार इतनी तनावपूर्ण स्थिति बनी कि परमाणु युद्ध की आशंका तक पैदा हो गई। छोटी सी गलती या गलतफहमी भी बड़े युद्ध में बदल सकती है।

अमेरिका का सैन्य खर्च बढ़ता है... उत्तर कोरिया को रोकने के लिए अमेरिका को जापान, दक्षिण कोरिया और प्रशांत क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती करनी पड़ती है। मिसाइल डिफेंस सिस्टम, युद्धपोत और सैनिकों पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं।

चीन और रूस को रणनीतिक फायदा मिलता है... उत्तर कोरिया का संकट अमेरिका का ध्यान एशिया में बांधे रखता है। इसका फायदा चीन और रूस उठाते हैं। अमेरिका एक साथ यूक्रेन, ताइवान और उत्तर कोरिया जैसे मोर्चों पर दबाव महसूस करता है।

परमाणु प्रसार का खतरा... अगर उत्तर कोरिया खुलेआम परमाणु शक्ति बना रहता है, तो दूसरे देश भी परमाणु हथियार बनाने की सोच सकते हैं। इससे दुनिया में परमाणु हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है, जो अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है।

अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर... अमेरिका खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश मानता है। लेकिन छोटा और आर्थिक रूप से कमजोर उत्तर कोरिया लगातार अमेरिका को चुनौती देता रहा है। इससे अमेरिका की ताकत और प्रभाव पर सवाल उठते हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध कमजोर पड़ते हैं... अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर कई प्रतिबंध लगाए। लेकिन चीन और रूस के समर्थन की वजह से ये पूरी तरह असरदार नहीं हो पाए। इससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय रणनीति को नुकसान पहुंचता है।

उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा। किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने हाल ही में कहा कि उत्तर कोरिया खुद को परमाणु शक्ति मानता है और यह फैसला अब बदला नहीं जा सकता। उन्होंने अमेरिका के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण पर राजी किया जा सकता है।

पिछले दिनों उत्तर कोरिया ने नए मिसाइल सिस्टम और क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी किया। किम जोंग उन ने हाल ही में परमाणु सामग्री बनाने वाले नए प्लांट का उद्घाटन किया और सेना की ताकत कई गुना बढ़ाने की बात कही। ऐसे में माना जा रहा है कि जिनपिंग इस दौरे में किम को आर्थिक मदद और राजनीतिक समर्थन का भरोसा दे सकते हैं।

Source: https://www.amarujala.com/world/xi-jinping-visits-north-korea-after-seven-years-worlds-eyes-on-meeting-will-china-back-kims-nuclear-plan-2026-06-08