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देश के 10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले 46 बड़े शहरों में रोजगार की तस्वीर तेजी से बदल रही है। सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। पहले के मुकाबले अधिक महिलाएं नौकरी कर रही हैं या रोजगार की तलाश में हैं। दूसरी ओर, पुरुषों की बेरोजगारी भी लगातार घटी है। रिपोर्ट बताती है कि बड़े शहरों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लोगों की औसत आय में सुधार हुआ है और असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबार भी रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार बाजार से जुड़ी हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि बड़े शहरों में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं और उनकी भागीदारी लगातार मजबूत हुई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) 2017-18 में जहां 19.8% था, वह 2025 में बढ़कर 27.2% हो गया। यानी महिलाओं की श्रम भागीदारी में 7.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। एलएफपीआर बताता है कि काम करने की उम्र (आमतौर पर 15 वर्ष या उससे अधिक) के कुल लोगों में से कितने लोग या तो काम कर रहे हैं या काम की तलाश कर रहे हैं। इसी तरह महिलाओं का वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (डब्ल्यूपीआर) 2017-18 में जहां 17.9% था, वह 2025 में बढ़कर 25.5% पहुंच गया। डब्ल्यूपीआर बताता है कि काम करने की उम्र (15 वर्ष या उससे अधिक) के कुल लोगों में से कितने लोग सही में काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक श्रम बाजार में पुरुषों की भागीदारी पहले जितनी ही बनी हुई है, इसमें कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों की एलएफपीआर 2017-18 में जहां 74.2% था, यह 2025 में मामूली रूप से बढ़कर 75.9% पर पहुंच गया। इसी तरह पुरुषों का डब्ल्यूपीआर 2017-18 में जहां 68.6% था, वह 2025 में मामलू रूप से बढ़कर 72.6% पर पहुंच गया।
महिलाओं की बेरोजगारी दर 2017-18 में 9.4% थी, जो 2018-19 में बढ़कर 10.4% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई और 2025 तक यह घटकर 6.1% रह गई। वहीं पुरुषों की बेरोजगारी दर में भी गिरावट देखने को मिली। साल 2017-28 में बेरोजगारी दर जहां 7.5% थी, वहीं 2025 में यह घटकर 4.5% पर पहुंच गई।
रिपोर्ट बताती है कि श्रम बाजार से बाहर रहने के पीछे महिलाओं और पुरुषों के कारण अलग-अलग हैं। पुरुषों में पढ़ाई सबसे बड़ी वजह है, जबकि महिलाओं के लिए घरेलू जिम्मेदारियां अभी भी रोजगार में शामिल होने की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
53.5% पुरुषों ने पढ़ाई जारी रखने को काम नहीं करने की वजह बताया।
68.7% महिलाओं ने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को मुख्य कारण बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के छोटे और असंगठित कारोबार अन्य शहरी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा रोजगार दे रहे हैं।
46 में से 19 शहरों में कुल कार्यबल में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी 30% से अधिक है।
46 में से 32 शहरों में 20% से अधिक प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में हैं।
महिला उद्यमिता के मामले में सूरत, वडोदरा और पुणे सबसे आगे हैं। इन शहरों में 40% से अधिक प्रतिष्ठान महिलाएं ही संचालित हैं।
महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और अपना कारोबार शुरू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, आसान ऋण उपलब्ध कराना, कौशल प्रशिक्षण देना और कारोबार शुरू करने में मदद करना है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई): महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने या बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है।
स्टैंड-अप इंडिया योजना: महिला उद्यमियों को नया कारोबार शुरू करने के लिए 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना: कुछ राज्यों में महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए अनुदान और बिना ब्याज का ऋण दिया जाता है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना: पारंपरिक कारीगर महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और 3 लाख रुपये तक का सस्ता ऋण दिया जाता है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन: ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़कर रोजगार और ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
महिला समृद्धि योजना: महिलाओं को सूक्ष्म और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
टीआरईएड योजना: महिलाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और व्यवसाय शुरू करने में सहायता प्रदान की जाती है।
कौशल उन्नयन व महिला कॉयर योजना: कॉयर (नारियल रेशा) उद्योग से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाते हैं।
वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने देश में 2,12,283 स्टार्टअप्स को मान्यता दी है।
इनमें 1,02,054 स्टार्टअप्स ऐसे हैं, जिनमें कम-से-कम एक महिला निदेशक या पार्टनर है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश में कम-से-कम एक महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2017 में जहां ऐसे स्टार्टअप्स की संख्या 1,945 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 23,718 हो गई। फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस): इस योजना के तहत सरकार सीधे स्टार्टअप्स में पैसा नहीं लगाती। पहले एसआईडीबीआई निवेश फंड (एआईएफ) को पैसा देता है और फिर ये फंड स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
31 जनवरी 2026 तक स्टार्टअप्स में करीब ₹25,859 करोड़ का निवेश किया गया।
इनमें से करीब ₹2,995 करोड़ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को मिला।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (एसआईएसएफएस): यह योजना नए और शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स को आर्थिक मदद देती है।
अब तक करीब ₹592 करोड़ की फंडिंग मंजूर की गई।
इसमें से करीब ₹294 करोड़ महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को मिला।
क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स (सीजीएसएस): इस योजना का मकसद स्टार्टअप्स को आसानी से बैंक से कर्ज दिलाना है।
अब तक करीब ₹925 करोड़ के कर्ज की गारंटी दी गई।
इनमें से करीब ₹39 करोड़ के कर्ज की गारंटी महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए दी गई।
सरकार महिलाओं को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीएस), महिला उद्यमियों और छोटे कारोबारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, सरकारी खरीद और ई-कॉमर्स से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फरवरी 2026 तक देश में 10.05 करोड़ से अधिक महिलाएं लगभग 90.09 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं।
2.1 लाख से अधिक महिला सूक्ष्म व लघु उद्यम (एमएसई) जीईएम पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में इन महिला उद्यमों को 13.7 लाख ऑर्डर मिले।
महिला उद्यमियों को ₹28,000 करोड़ से ज्यादा के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में 27.6% की वृद्धि दर्ज की गई है।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/how-is-employment-changing-in-india-s-big-cities-a-complete-report-card-on-women-s-rising-workforce-2026-06-30