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ब्रह्मोस आवाज की गति से लगभग तीन गुना (मैक 2.8 से 3) तेज रफ्तार उड़ान भरती है और अंतिम चरण में समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ सकती है, जिससे इसे रडार पर पकड़ना और बीच में इंटरसेप्ट करना (रोकना) लगभग असंभव हो जाता है। यह जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और हवा कहीं से भी दागी जा सकती है।

दूसरी ओर अस्त्र मिसाइल 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन के विमान को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है। वहीं, आकाश मिसाइल लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को आसानी से एक साथ निशाना बना सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में भारतीय रक्षा कंपनियां अपने राजस्व का केवल 1-2 फीसदी ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करती हैं, जबकि वैश्विक औसत 3.4% है एचएएल और बीडीएल जैसी कंपनियां इसका अपवाद जरूर हैं, लेकिन उन्नत तकनीक में बने रहने के लिए इस निवेश को बढ़ाना होगा।

विश्लेषकों का मानना है कि केवल हथियार बेचना ही काफी नहीं है; भारत को विदेश में मेंटेनेंस हब, स्पेयर पार्ट्स की निरंतर आपूर्ति और प्रशिक्षित तकनीकी टीमें तैनात करनी होंगी। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो भारतीय हथियारों की बिक्री के बाद के बाद की सेवा प्रभावित हो सकती है।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/india-arms-export-rise-missiles-demand-brahmos-akash-astra-beyond-indonesia-east-asia-europe-south-america-2026-07-08