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अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में इंडस्ट्री में बढ़ते पेड रिव्यू ट्रेंड, स्टार्स की बड़ी टीम और बदलते वर्क कल्चर पर खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि वे अपनी फिल्मों का प्रमोशन किस तरह करते हैं?
'बुरी फिल्मों को भी अच्छा साबित करने में पूरी टीम लग जाती है' फिल्मों के पेड रिव्यू और जबरदस्ती अच्छा माहौल बनाने के ट्रेंड पर मनोज बाजपेयी ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा, ‘आजकल कोई भी फिल्म जो बुरी भी होती है, उसको अच्छा बताया जाता है। उस एक्टर की पूरी टीम लग जाती है ये साबित करने में कि फिल्म अच्छी है...उनका परफॉर्मेंस बहुत कमाल का है। तो जो चीज बुरी है, उसको अच्छा साबित करने के लिए पूरी टीम लगी रहती है जी। और ये सब मैंने भी पढ़ा है, देखा नहीं। मैं जिस तरह का काम करता हूं, उसमें ये सब तो होता नहीं है।’ मेरे फैसले मैं खुद लेता हूं आज कई कलाकारों के फैसले उनकी टीम तय करती है। लेकिन मनोज कहते हैं कि उन्होंने हमेशा अपने फैसले खुद लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे साथ तो ऐसा नहीं है। मैं अपने फैसले खुद लेता हूं। स्क्रिप्ट पढ़ता हूं या फिर उसका नरेशन लेता हूं। ज्यादातर मैं स्क्रिप्ट पढ़ना पसंद करता हूं। आखिर में फैसला मेरा ही होता है।’
मेरे सेट पर मेरी टीम का कोई आदमी नहीं होता मनोज बाजपेयी ने कहा कि काम के दौरान वह अपनी निजी टीम को सेट से दूर रखते हैं और इसे डिसिप्लिन का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर आप मेरे सेट पर आकर देखें, तो आपको मेरी टीम का कोई आदमी आसपास दिखाई नहीं देगा। मीडिया इंटरैक्शन के दौरान भी आप देख रहे हैं- प्रोडक्शन के लोग हैं, कैमरा टीम है, लेकिन मेरी टीम का कोई सदस्य यहां मौजूद नहीं है, क्योंकि हमने एक डिसिप्लिन बनाया हुआ है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जब हम काम कर रहे होते हैं, मेरा स्टाफ उस दायरे से बाहर रहता है। वहां कैमरा है, डायरेक्टर है, मेरे साथ दूसरे कलाकार हैं। वो एक अलग जोन होता है। उसमें मेरा बॉय, असिस्टेंट या मेकअप मैन तभी आएगा जब उसे बुलाया जाएगा। उनका काम कहीं और है, इस स्पेस में नहीं।’
मुझे बड़ी टीम के साथ चलने की जरूरत नहीं पड़ती जहां कई कलाकार बड़े सपोर्ट सिस्टम के साथ चलते हैं, वहीं मनोज का कहना है कि उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं होती। उन्होंने कहा, ‘अब हर किसी को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी है। मैं किसी को जज नहीं करता। जो बात आप कर रही हैं, उसके बारे में मैं कभी-कभी पढ़ लेता हूं, लेकिन वो दुनिया मेरे लिए काफी अनजान है। हो सकता है किसी अभिनेता को इतने सपोर्ट सिस्टम की जरूरत हो, मुझे नहीं है। मैं अपने लिए काफी हूं। मेरा कॉस्ट्यूम, मेरा मेकअप, बहुत सारी चीजें मैं खुद संभाल लेता हूं।’
कई बार हेयर स्टाइलिस्ट भी साथ नहीं ले जाता मनोज का कहना है कि वह फिल्मों में दिखावे के बजाय जरूरत के हिसाब से चीजें तय करते हैं। उन्होंने कहा, ‘कई बार मैं अपने हेयर स्टाइलिस्ट को भी साथ नहीं ले जाता। अगर फिल्म को उसकी जरूरत नहीं है, तो वो नहीं जाता। कई बार तो मेरे मेकअप मैन की तारीफ इस बात के लिए होती है कि उसने कुछ किया ही नहीं, बस मुझे वैसे ही रहने दिया। और कई फिल्मों में तो वो आता भी नहीं, सिर्फ तब आता है जब उसकी वाकई जरूरत हो।’
बड़ी फिल्मों में ऐसा चलता होगा, मैं जरूरत के हिसाब से काम करता हूं अभिनेता ने कहा कि वह ज्यादातर छोटी और मीडियम बजट की फिल्मों में काम करते रहे हैं, इसलिए हर चीज जरूरत देखकर तय करते हैं। उन्होंने कहा, ‘सच्चाई ये है कि मैं ज्यादातर छोटी या मीडियम बजट की फिल्में करता रहा हूं। इसलिए मैं हर चीज फिल्म की जरूरत के हिसाब से तय करता हूं। जो लोग बड़ी फिल्मों में काम करते हैं, उनके तरीके अलग हो सकते हैं। वहां अगर मेकर्स उस पूरे सेटअप की इजाजत देता है, तो फिर बाद में उसे शिकायत करने का भी कोई हक नहीं है।’
मैं सिर्फ अपनी फिल्मों का प्रमोशन करता हूं, बाकी चीजों में नहीं पड़ता मनोज कहते हैं कि वह अपनी फिल्मों का प्रमोशन जरूर करते हैं, लेकिन चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने में यकीन नहीं रखते। उन्होंने कहा, ‘हम अपनी फिल्मों को प्रमोट करते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हमारी फिल्म को लेकर जागरूक हों। उसके बाद फिर हम अगली फिल्म में चले जाते हैं। और मैं इस बात पर यकीन करता हूं कि जो होगा, वो होगा। अपना काम शिद्दत से कीजिए, क्योंकि आपके भाग्य का कोई कुछ नहीं ले जा सकता।’
Source: https://www.amarujala.com/entertainment/celebs-interviews/manoj-bajpayee-exclusive-interview-actor-raises-questions-about-the-changing-culture-of-film-industry-2026-06-20