खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

कार की मरम्मत में असामान्य देरी से जुड़ा एक लंबा विवाद आखिरकार उपभोक्ता आयोग के फैसले के साथ समाप्त हुआ। एक Nissan (निसान) कार मालिक की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी, डीलर और वर्कशॉप को सर्विस में कमी का दोषी मानते हुए 11 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

मामला उस कार से जुड़ा है, जो कथित तौर पर करीब आठ वर्षों तक वर्कशॉप में पड़ी रही, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं हो सकी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कमल कुमार सराफ ने जनवरी 2014 में पटना स्थित ऊर्जा ऑटोमोबाइल से एक Nissan Evalia (निसान इवेलिया) खरीदी थी।

कार की कीमत लगभग 11.46 लाख रुपये थी।

उन्होंने 11,322 रुपये देकर एक्सटेंडेड वारंटी भी खरीदी।

हालांकि, उनका दावा है कि उन्हें न तो वारंटी कार्ड मिला और न ही उसका बिल दिया गया।

कार कई वर्षों तक सामान्य रूप से चलती रही, लेकिन बाद में उसमें स्टार्ट होने से जुड़ी समस्या आने लगी।

अगस्त 2018 में सराफ ने कार को मरम्मत के लिए मुजफ्फरपुर स्थित निसान सर्विस सेंटर में जमा कराया।

वर्कशॉप ने उनकी अनुमति के बिना इंजन खोल दिया।

बाद में इंजन बदलने के लिए 4.82 लाख रुपये की मांग की गई।

हालांकि, वर्कशॉप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इंजन खोलने के लिए अनुमति ली गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मरम्मत की लागत कई बार बदली गई और बाद में इसे लगभग 3.91 लाख रुपये पर तय किया गया।

सराफ का कहना था कि उनकी कार केवल करीब 23,000 किलोमीटर ही चली थी।

एक्सटेंडेड वारंटी की सीमा 80,000 किलोमीटर तक थी।

इसलिए मरम्मत बिना किसी शुल्क के होनी चाहिए थी।

दूसरी ओर, कंपनी और सर्विस सेंटर का कहना था कि जब यह समस्या सामने आई, तब तक वारंटी अवधि समाप्त हो चुकी थी।

कई बार फॉलो-अप करने के बावजूद कार की मरम्मत नहीं की गई।

कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी वाहन वापस नहीं किया गया।

मरम्मत की लागत बार-बार बदली जाती रही।

यही वजह रही कि यह मामला लंबे समय तक विवाद में बना रहा।

पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में डीलर, निसान से जुड़ी संस्थाओं और वर्कशॉप को "सर्विस में कमी" का दोषी माना।

वाहन करीब आठ वर्षों तक वर्कशॉप में पड़ा रहा।

कम दूरी चली हुई और वारंटी के दायरे में होने का दावा करने वाली कार को इतने लंबे समय तक अनसुलझा छोड़ना उचित नहीं था।

आयोग ने माना कि इतने लंबे समय तक वर्कशॉप में पड़े रहने के बाद अब कार के दोबारा सड़क पर चलने योग्य होने की संभावना कम है। इसलिए मरम्मत का आदेश देने के बजाय मुआवजा देने का फैसला किया गया।

उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से निम्न भुगतान करने का निर्देश दिया:

1 सितंबर 2018 से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज

मानसिक और शारीरिक परेशानी तथा कानूनी खर्च के लिए 25,000 रुपये अतिरिक्त

आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए दो महीने का समय दिया है।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन कर दिया जाता है, तो संबंधित पक्ष वर्कशॉप में खड़ी कार को अपने कब्जे में वापस ले सकते हैं।

यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और बिक्री के बाद सेवा की जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है। जहां वर्षों तक लंबित रही मरम्मत का अंत आखिरकार मुआवजे के आदेश के साथ हुआ।

Source: https://www.amarujala.com/automobiles/nissan-ordered-to-pay-over-rs-11-lakh-compensation-after-customer-waited-8-years-for-car-repair-2026-06-20