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कभी चिकनगुनिया को मुख्य रूप से गर्म जलवायु वाले देशों की बीमारी माना जाता था, पर अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन इस बीमारी का भूगोल बदल सकता है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ऐसे मच्छरों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है जो चिकनगुनिया वायरस फैलाते हैं। इसके परिणामस्वरूप आने वाले दशकों में दुनिया के कई ठंडे क्षेत्र भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
भारत के लिए भी बढ़ सकती है चिंता प्रतिष्ठित जर्नल फ्रंटियर्स इन सेलुलर एंड इन्फेक्शन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार सदी के अंत तक उत्तर-पूर्वी उत्तरी अमेरिका, मध्य यूरोप और पूर्वी एशिया के कई हिस्से चिकनगुनिया के नए हॉटस्पॉट बन सकते हैं। अध्ययन में भारत के लिए भी चिंता जताई गई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि बीमारी नए क्षेत्रों में फैलती है तो 1.21 करोड़ भारतीय इसके जोखिम में आ सकते हैं।
क्या है चिकनगुनिया? चिकनगुनिया एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, थकान और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं। अधिकांश मरीज कुछ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई मामलों में जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।
Source: https://www.amarujala.com/world/climate-change-may-expand-chikungunya-risk-to-colder-regions-scientists-warn-2026-06-07