महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने राज्यसभा टिकट न मिलने को लेकर अन्याय की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी मांग थी यह है कि उन्हें भी वही अवसर मिले, जो अन्य नेताओं को मिला है।

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वरिष्ठ राष्ट्रीय बाल्यपाल नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने सोमवार को अपने साथ हुए अन्याय की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भी वही न्याय मिलना चाहिए, जो दूसरों को मिला है।

पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र जैन ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बात किया। इस दौरान भुजबल ने स्वीकार किया कि वह नामांकन पाने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने पार्टी से यह भी अनुरोध किया था कि उनके भतीजे और पूर्व सांसद समीर भुजबल को उनका मंत्री पद दिया जाए। अपने बचाव में भुजबल ने कहा कि राज्य में इसके कई उदाहरण मौजूद हैं।

'वही न्याय चाहता था जो दूसरों को मिला' उन्होंने कहा 'एनसीपी विधायक मकरंद पाटिल राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। वहीं, उनके भाई नितिन पाटिल राज्यसभा सदस्य हैं। सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री हैं, उनके बेटे पार्थ पवार राज्यसभा में हैं। एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री हैं। उनके बेटे श्रीकांत शिंदे लोकसभा में हैं। इसलिए मेरी भी यही इच्छा थी कि अगर मुझे राज्यसभा के लिए मनोनीत किया जाता है, तो मेरे भतीजे समीर भुजबल को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। मैं भी वही न्याय चाहता था जो दूसरों को मिला।'

'भाजपा ने अस्वीकार किया यह बात गलत' भुजबल ने इस बात से इनकार किया कि भाजपा ने उनके प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के समय इस पर विचार किया जाएगा और समीर भुजबल को मंत्री पद मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया, 'जब मेरा प्रस्ताव भाजपा के सामने रखा गया, तब निर्णय लेने के लिए केवल एक दिन बचा था। भाजपा ने जवाब दिया कि अगले राज्य मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान समीर भुजबल को मंत्री पद देने पर विचार किया जाएगा। इसलिए, भाजपा ने इसे अस्वीकार किया यह बात गलत है।'

जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या उन्हें कभी अन्याय का सामना करना पड़ा, तो भुजबल ने कहा 'कैसा अन्याय? आजकल चीजें ऐसी ही चलती हैं। हमारी नीति है 'अगर आज नहीं तो कल; अगर कल नहीं तो परसों।' मैं कबड्डी खिलाड़ी हूं, शतरंज खिलाड़ी नहीं।' उन्होंने कहा 'मुझे गुस्सा नहीं है। गुस्सा होने की क्या वजह है? लेकिन दूसरों को जो न्याय मिला है, वही न्याय मुझे भी मिलना चाहिए था। दूसरे नेता राज्यसभा या लोकसभा में हैं। उनके बच्चे राज्य में मंत्री हैं। मैं एनसीपी की स्थापना से ही इसके निर्माण में अग्रणी रहा हूं। इसलिए, मेरी मांग बस इतनी थी कि मुझे भी वही न्याय मिले।'

गौरतलब है कि जब भुजबल को मंत्री पद दिलाने में असमर्थ रहने के बाद उन्होंने खुद को अलग कर लिया, तो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने राज्यसभा के लिए अपने करीबी विश्वासपात्र राजेंद्र जैन के नाम की सिफारिश की। इसे कोर कमेटी और विशेष रूप से पार्थ पवार ने मंजूरी दे दी।

Source: https://www.amarujala.com/india-news/i-wanted-the-same-justice-that-others-got-says-chhagan-bhujbal-on-not-getting-rajya-sabha-ticket-2026-06-08