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उद्योगपति अनिल अंबानी को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें काला धन अधिनियम के तहत उन पर मुकदमा चलाने और जुर्माने जैसी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। अंबानी ने अपनी याचिका में इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। उनकी याचिका को उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।
आयकर विभाग ने 8 अगस्त, 2022 को अनिल अंबानी को एक नोटिस जारी किया था। विभाग ने उन पर 814 करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित धन पर 420 करोड़ रुपये के कर की कथित चोरी का आरोप लगाया है। यह धन दो स्विस बैंक खातों में रखा गया था। विभाग के नोटिस के अनुसार, अंबानी पर काला धन अधिनियम की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इन धाराओं में अधिकतम 10 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। विभाग का आरोप है कि अंबानी ने जानबूझकर अपने विदेशी बैंक खातों का विवरण और वित्तीय हितों का खुलासा नहीं किया।
अनिल अंबानी ने अपनी याचिका में कहा है कि काला धन अधिनियम 2015 में लागू हुआ था। जबकि जिन लेनदेन पर आरोप लगाए गए हैं, वे मूल्यांकन वर्ष 2006-2007 और 2010-2011 के हैं। अंबानी का तर्क है कि इस अधिनियम के प्रावधानों का पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं हो सकता है। यानी, इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने अधिनियम के कुछ प्रावधानों को भारत के संविधान के "शक्तियों से परे" या "उल्लंघनकारी" बताया है।
आयकर विभाग के नोटिस के अनुसार, अनिल अंबानी बहामास स्थित 'डायमंड ट्रस्ट' नामक एक इकाई के आर्थिक योगदानकर्ता और लाभकारी मालिक थे। इसके अलावा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में शामिल 'नदर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड (NATU)' नामक एक अन्य कंपनी से भी उनका संबंध बताया गया है। विभाग का आरोप है कि अंबानी ने अपने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने में इन विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया। इस तरह उन्होंने काला धन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। कर अधिकारियों ने दो खातों में अघोषित धन का कुल मूल्य 8,14,27,95,784 रुपये आंका है। इस पर देय कर 4,20,29,04,040 रुपये है।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/bombay-high-court-anil-ambani-gets-interim-protection-in-black-money-act-case-2026-06-10