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भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के बाहरी क्षेत्र के आंकड़े संकलित करने के लिए एक महत्वपूर्ण वार्षिक सर्वेक्षण शुरू किया है। यह सर्वेक्षण म्यूचुअल फंडों की विदेशी देनदारियों और परिसंपत्तियों से संबंधित है। इसका उद्देश्य भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम का सटीक आकलन करना है। यह 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए जानकारी एकत्र करेगा।
इस सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी नीति निर्माताओं और विश्लेषकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उन्हें भारत के विदेशी वित्तीय जोखिम की निगरानी करने में सहायता करती है। साथ ही, यह आर्थिक विश्लेषण और नीति निर्माण के लिए आवश्यक बाहरी क्षेत्र के महत्वपूर्ण आंकड़े तैयार करने में भी मदद करती है। आरबीआई का यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह पारदर्शिता और सटीक डेटा उपलब्धता को बढ़ावा देता है।
आरबीआई ने बताया कि सर्वेक्षण का यह नवीनतम दौर केंद्रीकृत सूचना प्रबंधन प्रणाली (सीआईएमएस) के सर्वेक्षण मॉड्यूल के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका लक्ष्य डेटा की गुणवत्ता में सुधार करना और रिपोर्टिंग करने वाली संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत जानकारी की सटीकता सुनिश्चित करना है। यह मंच सर्वेक्षण डेटा के सफल रूप से जमा होने पर स्वचालित ईमेल पावती भी प्रदान करता है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि वेब-आधारित प्रणाली रिपोर्टिंग प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाई गई है। यह डेटा गुणवत्ता के आश्वासन तंत्र को भी मजबूत करती है। आरबीआई ने सभी म्यूचुअल फंडों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक जानकारी जमा करने की सलाह दी है। इससे देश के बाहरी क्षेत्र के आंकड़ों का समय पर संकलन और प्रसार सुनिश्चित हो सकेगा। यह भारत की वैश्विक वित्तीय स्थिति की स्पष्ट तस्वीर पेश करने में सहायक होगा।
Source: https://www.amarujala.com/business/business-diary/rbi-s-big-move-keen-eye-on-foreign-investment-seeks-key-information-from-mutual-funds-2026-06-01