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ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, अंतरिम आवंटन में उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा 9,721.48 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 7,707.21 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 7,585.49 करोड़ रुपये, राजस्थान को 7,581.87 करोड़ रुपये और बिहार को 6,715.83 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
राज्यों के लिए कुल 92,550.17 करोड़ रुपये और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 1,291.52 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा केंद्रीय प्रशासन और सोशल ऑडिट के लिए 1,850.62 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं, जिससे कुल राशि 95,692.31 करोड़ रुपये हो जाती है।
चौहान ने कहा कि राज्यों के अनिवार्य अंशदान को जोड़ने के बाद इस योजना का कुल वार्षिक बजट लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये होगा। विपक्षी दलों और श्रमिक संगठनों द्वारा जताई जा रही आशंकाओं को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य के आवंटन में कमी नहीं की गई है। यह अंतरिम राशि पिछले वर्ष मनरेगा के तहत हुए खर्च के आधार पर तय की गई है।
उन्होंने बताया कि नई योजना को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं 26 राज्यों ने पूरी कर ली हैं, जबकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम में अभी कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं। हालांकि इन राज्यों के प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया और जल्द सभी प्रक्रियाएं पूरी करने का भरोसा दिया।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत कामों का चयन ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा तथा उन्हीं प्रस्तावों के आधार पर अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोजगार सृजन और मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की कमी या बाधा नहीं आनी चाहिए।
Source: https://www.amarujala.com/india-news/centre-announces-rs-95-thousand-crore-interim-allocation-under-vb-g-ram-g-2026-06-10