खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

सरकार द्वारा कर छूट दिए जाने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में बड़ा निवेश किया है। एफपीआई ने इन बॉन्डों में ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट मिलने के बाद 8,794.743 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह कदम भारत के घरेलू ऋण बाजार को मजबूत करने और रुपये को बाहरी दबावों से सहारा देने के लिए उठाया गया है।

सरकार ने यह कदम घरेलू ऋण बाजार में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाया है। इसका उद्देश्य बाहरी दबावों के बीच रुपये को समर्थन देना भी है। पहले विदेशी निवेशकों पर सूचीबद्ध शेयरों और बॉन्ड पर 12.5 फीसदी का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगता था। यह कर उन प्रतिभूतियों पर लगता था जिन्हें 12 महीने से अधिक समय तक रखा जाता था। सरकारी बॉन्ड पर अर्जित ब्याज पर 20 फीसदी का विदहोल्डिंग कर भी लगता था। नई छूट से निवेशकों को बड़ा लाभ मिलेगा, जिससे निवेश के प्रति उनकी रुचि बढ़ेगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी जून मौद्रिक नीति घोषणा में महत्वपूर्ण बदलाव किए। उसने एफएआर के तहत उपलब्ध प्रतिभूतियों का दायरा बढ़ाया है। इसमें 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय अवधि की सभी नई सरकारी प्रतिभूतियां शामिल की गईं। केंद्रीय बैंक ने सामान्य मार्ग के तहत एफपीआई निवेश के लिए कुछ सीमाएं भी हटाईं। इनमें अल्पकालिक निवेश, एकाग्रता और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से संबंधित सीमाएं शामिल हैं। आरबीआई ने कहा कि ये उपाय सरकारी उधारी के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेंगे। इन उपायों से बाजार में तरलता भी बढ़ेगी।

भारत सरकार इन उपायों के माध्यम से बॉन्ड बाजार को गहरा करना चाहती है। इसका लक्ष्य वैश्विक निवेशकों की अधिक भागीदारी को सुविधाजनक बनाना है। इन कदमों से सरकारी प्रतिभूति बाजार विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक खुल गया है। माताप्रसाद पांडे के अनुसार, यह भारत की वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने की संभावनाओं को बढ़ाता है। इन सूचकांकों में ब्लूमबर्ग का सॉवरेन बॉन्ड सूचकांक भी शामिल है। इसका समावेश निर्णय इस वर्ष की शुरुआत में टाल दिया गया था। अब भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।

एफएआर रूट मुख्य रूप से शेयरों के लिए नहीं, बल्कि भारत के सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश के लिए बनाया गया ढांचा है। एफएआर का पूरा नाम है फुली एक्सीसिबल रूट। इसे 2020 में भारतीय रिजर्व बैंक ने शुरू किया था। इसके तहत विदेशी निवेशक कुछ निर्धारित सरकारी बॉन्ड्स में बिना किसी निवेश सीमा के निवेश कर सकते हैं। मान लीजिए आरबीआई ने 100,000 करोड़ रुपये का एक सरकारी बॉन्ड एफएआर के तहत जारी किया। सामान्य नियमों में विदेशी निवेशकों के लिए इसमें निवेश की सीमा हो सकती है। एफएआर बॉन्ड में विदेशी निवेशकों पर ऐसी सीमा नहीं होती। वे अपनी इच्छा के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

Source: https://www.amarujala.com/business/bazaar/fpis-pour-rs-8-795-crore-into-far-securities-after-government-tax-exemption-2026-06-09